दिल्ली मुख्यमंत्री, दिल्ली शिक्षा मंत्री, डीयू कुलपति, यूजीसी अध्यक्ष, और एसओएल डायरेक्टर को भी बाल दिया भेंट में
सोमवार को सीबीसीएस (सेमेस्टर सिस्टम) एसओएल में मनमाने तरीके से लागू करने के खिलाफ केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर किया था विरोध प्रदर्शन
मानव संसाधन विकास मंत्रालय से तुरंत हस्तक्षेप कर एसओएल के लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बचाने की मांग उठाई
सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो
नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय के मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) के छात्रों ने आज अपने मुंडन किए हुए बाल केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, दिल्ली मुख्यमंत्री, दिल्ली शिक्षा मंत्री, यूजीसी अध्यक्ष, डीयू कुलपति, एसओएल डायरेक्टर को पोस्ट द्वारा भेजे। बीते 11 नवंबर को एसओएल छात्रों ने क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के बैनर तले डीयू प्रशासन द्वारा बिना तैयारी के एसओएल में नया सीबीसीएस पाठ्यक्रम लागू करके के फैसले के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर कल विरोध प्रदर्शन किया था।
उन्होने मंत्रालय के बाहर यह प्रदर्शित करने के लिए अपना मुंडन कराया कि प्रतीकात्मक तौर पर इन संस्थाओं का प्रशासन मर गया है। सिर के बालों का मुंडन भारतीय परंपरा के अनुसार तब किया जाता है जब किसी के अभिभावक की मृत्यु हो जाती है। एसओएल छात्रों ने जतलाया कि वो अनाथ महसूस कर रहे हैं और इसलिए भेंट-स्वरूप मुंडन किए हुए बाल उन्होने भेजे हैं।
ज्ञात हो कि सीबीसीएस पाठ्यक्रम लाने के बाद से आज तक एसओएल सेंटरों पर हुई कक्षाओं में भारी अफरा-तफरी व्याप्त रही है। न तो छात्रों को नए सिलेबस की जानकारी है और न टीचरों को ही यह पता है कि उन्हें क्या पढ़ाना है। साथ ही, इस बात को भी नहीं सुनिश्चित किया गया है कि कक्षा में जो पढ़ाया जा रहा है वो नए पाठ्यक्रम के अनुसार है। ज््यादातर छात्रों को स्टडी मटेरियल ही नहीं मिला है, जबकि उनकी परीक्षा इसी महीने 27 नवंबर से होने वाली है। तैयारी की कमी की स्थिति यह है कि लाखों छात्रों के एड्मिशन लिए होने के बावजूद ज्यादातर सेंटर लगभग खाली हैं क्योंकि उन्हें कक्षा की सूचना ही नहीं दी गयी है।
एसओएल एक ऐसा संस्थान जहाँ पर बहुसंख्यक छात्र रेगुलर में एड्मिशन नहीं मिलने के कारण मजबूरी में एड्मिशन लेते हैं और बहुसंख्यक छात्र समाज के सबसे शोषित और वंचित हिस्से से आते हैं। इन छात्रों की ओपन संस्थानों में नामांकन में बढ़ोत्तरी से साफ पता चलता है कि उनको जान-बूझकर इन संस्थानों में ढकेला जा रहा है। उनको अधूरे और बेकार स्टडी मटेरियल, शिक्षकों और सुविधाओं के बिना पढ़ने को मजबूर करना, उनके भविष्य के साथ खेलने के बराबर है। डीयू प्रशासन द्वारा 1.5 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खेलना पूर्णतः आपराधिक है।
एसओएल के लाखों छात्रों का भविष्य खराब होने से बचाने के लिए केवाईएस ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और डीयू के इस फैसले की वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही, यह भी मांग की कि इस साल एड्मिशन लेने वाले छात्रों की परीक्षाएँ वार्षिक तौर पर ही कराई जायें और अगले साल से इस फैसले को लागू करने की पूरी तैयारी की जाये। अपनी मांगें नहीं माने जाने पर आने वाले दिनों में छात्रों ने अपना आंदोलन तेज करने और शिक्षा मंत्री की पूरे दिल्ली में शवयात्रा निकालने की चेतावनी दी है ।